नई शिक्षा नीति में देरी की वजह से शिक्षा मंत्री से नाखुश आरएसएस नेता?

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नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति में हुई देरी से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाराज है। संघ के शिक्षा क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों ने इसे लेकर एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर के सामने भी अपनी नाखुशी जाहिर की है। सूत्रों के मुताबिक, जब संघ के शिक्षा संगठनों में काम कर रहे लोगों ने कई ऐसे कामों की लिस्ट गिनाई जो चार सालों में हो जाने चाहिए थे पर हुए नहीं, तब एचआरडी मिनिस्टर ने इसका दोष आईएएस लॉबी और तकनीकी दिक्कतों को दिया।
पिछले महीने संघ के अलग-अलग संगठनों के साथ बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों की मीटिंग हुई थी। इसी मीटिंग में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। इस पर चर्चा के दौरान एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर और संघ के शिक्षा क्षेत्र में काम कर रहे चार संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में एचआरडी मिनिस्टर के सामने नाखुशी जाहिर की गई कि शिक्षा क्षेत्र में चार साल में, जो काम होने चाहिए थे वह नहीं हुए। जिसके गलत संदेश जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में यह मसला उठाया गया कि इग्नू में लाखों बच्चे पढ़े हैं, लेकिन चार साल में इग्नू का करिकुलम रिवाइज करने की कोई कोशिश नहीं की गई साथ ही वहां वीसी का पद भी काफी वक्त से खाली है।
एनसीईआरटी में खाली पड़े कई पदों को लेकर भी बात हुई और कहा गया कि पद खाली होने से कामकाज पर असर पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, संघ के एक प्रतिनिधि ने इस मीटिंग में जावड़ेकर ने कहा कि डीयू में टीचर का अडॉक सिस्टम खत्म कर परमानेंट टीचर्स की नियुक्ति की जानी थी, जिसका वादा भी किया गया था, लेकिन चार सालों में इस दिशा में कुछ नहीं हुआ जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है। नई शिक्षा नीति को लेकर लगभग सभी प्रतिनिधियों ने नाखुशी जाहिर की और कहा कि चार साल में बहुत काम हो सकता था, लेकिन पॉलिसी न आने की वजह से नहीं हो पाया।
सूत्रों के मुताबिक, एक प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि सुझाव लेने का सिलसिला अनंत काल तक नहीं चल सकता और जरूरत के मुताबिक, पॉलिसी में बाद में बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन पॉलिसी आए तो सही। सूत्रों ने बताया कि एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने संघ प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि दिसंबर तक काफी काम हो जाएंगे। साथ ही उन्होंने कई कामों में देरी पर सफाई भी दी और कहा कि आईएएस लॉबी यथास्थितिवादी है और वह काम नहीं करना चाहती। मशीनरी अभी भी पुराने हिसाब से चल रही है इसलिए कई फाइलें लटकी रह जाती हैं।
सूत्रों के मुताबिक इंटीग्रेटेड बीएड शुरू न हो पाने को लेकर भी कुछ प्रतिनिधियों ने निराशा जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक कुछ यूनिवर्सिटी में वीसी के पद खाली हैं और एक यूनिवर्सिटी के लिए तो तीन महीने से वीसी का नाम फाइनल कर फाइल डीओपीटी के पास भेजी गई है, लेकिन उसमें कुछ भी नहीं हुआ। यह भी कहा गया कि हम ऐजुकेशन फील्ड में काम कर जो संदेश देना चाहते थे वह नहीं दे पाए हैं क्योंकि काफी काम हो ही नहीं पाए।

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