आंदोलनरत 200 आदिवासी हुए बीमार

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20 हजार से अधिक आदिवासी चौथे दिन भी डटे हुए आंदोलन पर
दंतेवाड़ा।
पहाड़ और अपनी सांस्कृतिक विरासत बचाने के लिए आदिवासियों का आंदोलन लगातार चौथे दिन भी जारी है। इनके धरने प्रदर्शन पर मौसम की मार का असर दिखने लगा है, अब इनकी तबियत बिगडऩे लगी है। अब तक लगभग 200 आदिवासी बीमार हो चुके हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
बीते शुक्रवार से आदिवासी एनएमडीसी के गेट के सामने धरने पर बैठे हैं। भीषण गर्मी, फिर बारिश और अब फिर भीषण गर्मी के बीच इनका आंदोलन जारी है। अपने पूरे परिवार के साथ इन आदिवासियों का महाआंदोलन जारी तो है, लेकिन लगातार मौसम में बदलाव की वजह से उल्टी, दस्त और बुखार से पीडि़त हो रहे हैं। रविवार देर रात लगभग डेढ़ सौ आदिवासियों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहीं सोमवाह सुबह भी 50 से अधिक लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
इस आंदोलन में 20 हजार से ज्यादा आदिवासी जंगलों के भीतर से पैदल यात्रा करते हुए धरना स्थल पर पहुंचे हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में आदिवासियों के आंदोलन को लेकर प्रशासन द्वारा किसी तरह की कोई स्वास्थ्य सेवा संबंधी व्यवस्था नहीं की गई है।
भूखे-प्यासे खुले आसमान के नीचे सडक़ पर बैठे इन आदिवासियों को देखकर एनएमडीसी बचेली के मजदूर संगठनों का दिल पसीज गया है, उन्होंने भी अपना काम धीमा करने का ऐलान कर दिया है, वहीं इसी बीच पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम और बस्तर सांसद दीपक बैज भी आंदोलनकारियों के बीच किरंदुल पहुंच रहे हैं।

आदिवासी ही बचा सकते हैं जंगल- सीएम

खुद मुख्यमंत्री भी कहते हैं कि आदिवासियों की वजह से जंगल सुरक्षित हैं। 8 जून को उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि सदियों से जंगल को बचाकर रखा है, वे जंगल को बचा सकते हैं। जब खुद मुख्यमंत्री भी आदिवासियों के साथ खड़े होने की बात सत्ता संभालने से पहले से लेकर अब तक कहते रहे हैं, ऐसे में प्रकृति पुत्र आदिवासियों की निगाह भी मुख्यमंत्री की ओर है।