जम्मू कश्मीर के विधानसभा परिसीमन पर नहीं हुई कोई चर्चा : गृह मंत्रालय

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नई दिल्ली। केंद्रीय गृमंत्रालय ने जम्मू कश्मीर में नए सिरे से विधानसभा सीटों के परिसीमन की तैयारी से इनकार किया है। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि परिसीमन को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है और न ही इस बारे में कोई चर्चा की गई है।
दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने गत मंगलवार को मंत्रालय के आला अधिकारियों, खुफिया ब्यूरो के प्रमुख और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसके ठीक बाद शाह ने रेलमंत्री पीयूष गोयल, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ बैठक की। बैठक के बाद कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं दी गई किंतु ऐसी चर्चा रही कि शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जम्मू कश्मीर में नए सिरे से विधानसभा सीटों के गठन के लिए केंद्र सरकार परिसीमन आयोग के गठन पर विचार विमर्श किया गया।
मीडिया में ऐसी खबरें आने के बाद मंत्रालय ने इसे निराधार बताते हुए कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव उसके पास नहीं है। गृहमंत्रालय की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि परिसीमन को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है और न ही जम्मू क्षेत्र की विधानसभा सीटों के परिसीमन के लिए आयोग गठित करने का विचार है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गत मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट मंत्रियों के समूह की बैठक पेट्रोलियम पदार्थों के मुद्दे पर हुई थी, न कि सुरक्षा के मुद्दे पर।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में तीन भाग हैं जम्मू, कश्मीर और लद्दाख। कश्मीर आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा हिस्सा है। यह इलाका आतंकवाद के कारण काफी तनावग्रस्त है। वहीं आबादी के लिहाज से दूसरे नंबर पर आने वाले जम्मू के लोगों की शिकायत है कि मौजूदा व्यवस्था में प्रतिनिधित्व के हिसाब से उसकी भागीदारी कश्मीर की तुलना में कम है।
वर्ष 2001 की जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें तो जम्मू क्षेत्र में 53 लाख लोग रहते हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 43 प्रतिशत है। 87 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में जम्मू से 37 सीटें हैं। दूसरी तरफ कश्मीर में 69 लाख लोग रहते हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 55 प्रतिशत है और यहां से विधानसभा की 46 सीटें हैं। जबकि लद्दाख की आबादी 2.7 लाख है और चार विधानसभा सीटें हैं।