नाम बदल-बदलकर मनमानी शुल्क वसूल रहे निजी स्कूल

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जगदलपुर। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर प्रतिबंध लगाते हुए कलेक्टर ने गाइडलाइन जारी की है। इसके बाद से स्कूल चलाने वाले परेशान हैं। गाइडलाइन के मुताबिक री-एडमिशन के नाम पर अब तक हुए एडमिशन में लिया गया शुल्क वापस करना होगा। वापस नहीं किया जाता है तो स्कूल के अन्य जरूरी शुल्क में एडजस्ट करना होगा। स्कूल प्रबंधन ऐसा नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक अब तक री-एडमिशन के नाम पर लिए जाने वाले शुल्क का नाम बदल दिया है। अब इसे सालाना या एनुअल शुल्क बताकर वसूला जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम ने बताया कि किसी भी हालत में वसूल की गई रकम स्कूल प्रबंधन अपने पास नहीं रख सकेगा। अगर इस राशि को एडजस्ट नहीं किया जाता तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों की मान्यता भी रद्द हो सकती है। प्राइवेट स्कूलों में कितने प्रकार की फीस ली जाती है, इसकी पूरी जानकारी मंगाई गई है। कहीं भी अगर ऐसी बात आती है कि अनावश्यक रूप से फीस ली जा रही है तो संबंधित स्कूल पर कार्रवाई करते हुए मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
री-एडमिशन के नाम पर प्राइवेट स्कूलों ने हजारों रुपए पालकों से जमा कराए हैं। सरकारी शुल्क केवल 5 रुपए है। इसमें भी अगर स्कूल से बच्चे का नाम काट दिया जाता है और इसके बाद बच्चे को दोबारा दाखिला दिलवाना है तो यह शुल्क लगता है। इसमें ढाई रुपए रुपए का शुल्क नाम काटने और ढाई रुपए का शुल्क दोबारा दाखिला करने के लिए है। कुल 5 रुपए का शुल्क ही जमा कराना होता है। ये शुल्क भी बाकायदा चालान के जरिए जमा कराया जाना होता है।