बस्तर में अवैध रूप से चल रहा ब्याज का कारोबार

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जगदलपुर। इस समय पूरे जिले में ब्याजखोरों की बाढ़ सी आ गई है। बिना साहूकारी लाइसेंस के ही दर्जनों लोगों द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को कर्ज देने और मनमाना ब्याज वसूलने का कारोबार किया जा रहा है। कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके द्वारा दिये गये छोटी सी रकम का ब्याज इतना अधिक वसूला जाता है कि ली गई रकम का दोगुना तक ब्याज में उनसे वसूला जाता है। समय पर रकम की आवश्यकता होने पर उनको ब्याज पर ऐसे ब्याजखोरों से राशि प्राप्त करने विवशता होती है।
जानकारी के अनुसार इस संबंध में प्रशासन द्वारा उचित देख-रेख का अभाव नहीं होने से सूदखोरों के चंगुल में निर्धन वर्ग अधिक कर्ज की चक्की में पीस रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इन ब्याजखोरों द्वारा कर्जदारों से रकम वसूल करने के लिए असामाजिक तत्वों का सहारा भी लिया जाता है। वहीं कुछ जरूरतमंद लोगों से उधार के रकम की लिखा-पढी कर सालाना 120 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूल उनका गला काटा जा रहा है। कर्ज की वसूली के लिए असामाजिक तत्वों का उपयोग आम बात है। जिले में महाजनी के एक भी लाइसेंस नहीं लिए गए हैं। इसकी पुष्टि जिला प्रशासन ने की है। जिले के ग्रामीण इलाकों में तो सूदखोरी का व्यवसाय काफी दिनों से चल रहा है। शहर में भी कुछ लोगों के द्वारा साहूकार अधिनियम को ताक में रखते हुए ब्याज का धंधा किया जा रहा है। कुछ लोग जहां जेवरात आदि गिरवी रखकर कर्ज दे रहे हैं तो कुछ लोग चल-अचल संपत्ति भी गिरवी रख रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिले के बस्तर, भानपुरी, करपावंड, बालेंगा, सोनारपाल व चपका में यह गोरखधंधा चल रहा है।
इस संबंध मेें अतिरिक्त जिलाधीश अरविंद एक्का ने एक जानकारी में कहा कि अभी तक कर्ज देने का कारोबार करने एक भी लायसेंस जारी नहीं हुआ है। इस संबंध में सूदखोरों से पीडि़त मामले की शिकायत भी नहीं मिली है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।