शिक्षा का अधिकार भर्ती में बच्चों को हो रही परेशानी का मामला पहुंचेगा हाईकोर्ट

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राजनांदगांव। शिक्षा का अधिकार भर्ती में गरीब बच्चों को हो रही परेशानी दूर होती नजर नहीं आ रही है। आरटीई वेब-पोर्टल में अभी तक सही जानकारी अपलोड नहीं किया गया है। जिन स्कूलों को कई वर्षो से स्कूल संचालित करने की मान्यता नहीं दिया गया है, ऐसे प्राईवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को आरटीई के अंतर्गत प्रवेश दिया जा रहा है। राज्य शासन ने आरटीई आवेदनों का ऑनलाईन परीक्षण करने का निर्देश जारी किया है, लेकिन कई नोडलों के द्वारा ऑफ लाईन आवेदनों और दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। हर नोडल अपने-अपने तरीके से आवेदनों और दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है और पालकों के मोबाईल में मैसेज आ रहे कि आपका आरटीई आवेदन अधूरा है या रिजेक्ट कर दिया गया, लेकिन क्यों अधूरा है या क्यों रिजेक्ट कर दिया गया इसकी जानकारी मोबाईल में नहीं दिया जा रहा है। पालक पूरी रीति से भ्रमित हो रहे है और नोडल अधिकारियों और डीईओ कार्यालय के चक्कर काट रहे है, लेकिन उन्हे सही जानकारी देने वाला कोई नहीं है।
छग पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि आरटीई वेबपोर्टल में स्कूल, आरक्षित सीट्स और प्राप्त आवेदनों की सही जानकारी अभी तक अपलोड नहीं किया गया है। डीईओ और डीपीआई दोनों भिन्न जानकारी दे रहे है, जिससे पालक भ्रमित हो रहे है। सही जानकारी सार्वजनिक करने हमने डीईओ से निवेदन किया था, लेकिन अभी तक हुआ नहीं है। इसलिए अब हम सोमवार को इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने जा रहे है, ताकि गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का समुचित लाभ दिया जा सके। पालकों से हम निवेदन कर रहे है कि यदि आपके आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गया है तो तत्काल इसकी सूचना हमें दे, ताकि इसकी जानकारी हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जा सके।