बस्तर में बारूदी सुरंग विस्फोटों से 25 साल में 550 जवानों समेत 700 लोगों ने गंवाए प्राण

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नक्सली रणनीति के आगे माइंस प्रोटेक्टेड व्हीकल भी हुए नाकाम

जगदलपुर। नक्सलियों द्वारा बस्तर संभाग में विभिन्न क्षेत्रों में बिछाये गये बारुदी सुरंग विस्फोटों में बीते 25 सालों में 550 जवान और 150 ग्रामीण जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, अपनी जान गंवा चुके हैं। बस्तर में बारूदी सुरंगों से बचाव के लिए यहां माइंस प्रोटेक्टेड व्हीकल (एमपीवी) भी कारगर साबित नहीं हो पाई हैं।
यहां यह उल्लेख करना लाजिमी होगा कि 3 सितंबर 2005 को बीजापुर के पदेड़ा में नक्सलियों ने बारुदी सुरंग विस्फ ोट कर बुलेट पू्रफ खिड़कियों वाली, 10 किलो विस्फ ोटक, मीडियम मशीनगन और हैंडग्रेनेड की मार सह सकने वाली 8 टन की एमपीवी को उड़ाकर सुरक्षा बलों को चौंका दिया था। इस वारदात में सीआरपीएफ के 24 जवान शहीद हुए थे, जिसके बाद सरकार ने घटना के दूसरे दिन ही नक्सलियों और उनके सहयोगी संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया था। आमतौर पर बारूदी सुरंगें मानसून के पहले लगाई जाती हैं। ताकि बारिश में वह अच्छे से जम जाएं। देखा गया है कि नक्सली अपने बंद के दौरान यातायात बाधित कर सडक़ों पर बैखौफ बारूद बिछाते रहे हैं।

फ ारेंसिक एक्सर्पट सूरी बाबू के अनुसार बस्तर में नक्सली विस्फ ोट के लिए रिमोट पद्धति का उपयोग करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन यह पद्धति यहां कारगर साबित नहीं हो पाई। दरअसल रिमोट पद्धति के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यदि किसी काफि ले के साथ जैमर गाड़ी चलती है, तो रिमोट काम करना बंद कर देता है। इसके अलावा टारगेट के बीच में अचानक यदि कोई गाड़ी, जानवर या कोई अन्य वस्तु आ जाए, तब भी यह पद्धति फेल हो जाती है। दूसरे शब्दों में इस पद्धति में टाइम श्योरिटी नहीं होती है, इसीलिए नक्सली इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।
बारूदी विस्फ ोट से बचने में एमपीवी को नाकाम होता देख एमपीवी को मॉडिफ ाइड कर शॉक एब्जार्वर बढाकऱ, इसकी विस्फोट सहने की क्षमता बढ़ाई गयी, किंतु नक्सलियों ने इसका भी तोड़ ढूंढते हुए विस्फ ोटक की मात्रा बढ़ा दी। नक्सली पहले 50 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट से एमपीवी उड़ाते थे। बाद में 80 किलो तक विस्फोटक का इस्तेमाल करने लगे। मॉडिफ ाइड एमपीवी 40 किलो विस्फ ोट की तीव्रता झेल लेती है। लिहाजा एमपीवी आज भी बारुदी सुरंग से बचाव में नाकाम साबित हो रही है। यही वजह है कि नक्सली अब तक 6 दफे एमपीवी को निशाना बना चुके हैं। हाल ही में दंतेवाड़ा विधायक भीमा मण्डावी की नक्सलियों ने विस्फोट कर हत्या कर दी थी, इस जांच के लिए फ ारेंसिक टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है।