टर्म लाइफ इंश्योरेंस हो सकता है महंगा

0
20

पडऩे वाली है महंगाई की एक और मार
बेंगलुरू।
टर्म इंश्योरेंस की प्रीमियम कीमतें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। हाल ही में एक रीइंश्योरेंस कंपनी द्वारा पिछले तीन महीने के दौरान कराए गए सर्वे में यह जानकारी मिली है कि व्यक्तिगत टर्म इंश्योरेंस बिजनेस के लिए रीइंश्योरेंस प्रीमियम कीमतें बढ़ाने की जरूरत है। रीइंश्योरेंस कंपनियां ही एक टर्म इंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट के लिए अंतिम जोखिम लेने के लिए जिम्मेदार होती हैं और इंश्योरेंस कंपनी के साथ मिलकर कीमतें तय करती हैं। इसके बाद ही यह अंतिम कीमतें ग्राहक से ली जाती है।
वर्तमान समय में टर्म इंश्योरंस कीमतें इस आकलन पर आधारित होती हैं कि मौजूदा प्रतिस्पर्धी टर्म इंश्योरेंस प्लान्स के अंतर्गत शामिल किए जाने वाले ग्राहकों के समूह की मृत्यु दर औसत भारतीय जनसंख्या में होने वाली मौतों का लगभग एक चौथाई या 25 फीसदी होगी। अगर आप एक कदम आगे जाते हैं, तो यह देखते हैं कि टर्म इंश्योरेंस की ऑनलाइन कीमतें और भी सस्ती हैं, जो कि औसत भारतीय ग्राहक की मृत्यु दर को लगभग 20 फीसदी मानते हुए तय की जाती हैं। इसका कारण यह है कि ऑनलाइन प्लान्स अधिक समृद्ध ग्राहक वर्ग को टार्गेट करते हैं, जिनकी जीवन प्रत्याशा बेहतर होती है।
पालिसीबाजार डॉट कॉम के लाइफ इंश्योरेंस के चीफ बिजनेस आफिसर संतोष अग्रवाल ने कहा कि ऑफलाइन कीमतें ऑनलाइन मिलने वाले प्लान्स से अधिक इसलिए होती हैं क्योंकि यह कीमतें औसत भारतीय जनसंख्या मृत्यु दर का लगभग एक तिहाई या 33 फीसदी मानते हुए तय की जाती हैं। इसी मूल आकलन पर मौजूदा कीमतें आधारित हैं, जिसमें अब बदलाव होने जा रहा है। एक प्रमुख रीइंश्योरेंस कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो ग्रुप की सभी इंश्योरेंस कंपनियों को नोटिस भेजकर कहा है कि अगले 90 दिनों में कीमतें बढ़ा दी जाएंगी। ऐसे में लाइफ इंश्योरेंस के लिए रीइंश्योरेंस कीमतें बढऩे के कारण इंश्योरेंस कंपनियां भी अंतिम ग्राहक के लिए कीमत बढ़ाने को मजबूर हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि रीइंश्योरेंस कंपनी ने जिन ग्राहकों के समूह का आकलन किया है उसके आधार पर वास्तविक मृत्यु अनुमान के रुझान भले ही शुरुआती हैं, लेकिन इस बात का संकेत देने के लिए काफी हैं कि वास्तविक अनुभव और उनके लिए मौजूदा कीमतें काफी कम हैं।