राज्य स्तरीय युवा महोत्सव : कलाकारों ने विविध कलाओं ने बिखेरा जादू

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रायपुर। राज्य में प्रारंभ हुए तीन दिवसीय राज्य स्तरीय युवा महोत्सव के पहले दिन विविध कलाओं में कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मनमोह लिया। यहां युवाओं द्वारा विविध कलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है।
संगीत ने सब को किया मंत्रमुग्ध : राज्य स्तरीय युवा महोत्सव के पहले दिन आज यहां पंण् दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में लोकगीतों के साथ ही शास्त्रीय संगीत की स्वरलहरियों ने श्रोताओं को दिनभर मंत्रमुग्ध किया। लोकगीतों में 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग में 25 जिलों तथा 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 16 जिलों ने प्रस्तुति दी। पंण् दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में ही आयोजित हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में युवाओं ने कई रागों पर अपने स्वरों को साधा। हिंदुस्तानी संगीत श्रेणी के अंतर्गत राग भीमप्लासीए खयाल गायकी में छोटा खयाल व बड़ा खयालए तरानाए राग यमनए राग बिहार और राग भैरव सहित कई रागों में युवाओं ने शास्त्रीय संगीत के विविध आयामों से श्रोताओं को रू.ब.रू कराया। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग में 26 जिलों तथा 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पांच जिलों के कलाकरों ने प्रस्तुति दी।
युवाओं ने नाटकों से दिया समाज को जागरूकता का संदेश :
युवाओं ने नाटकों के जरिए समाज को संदेश दिए। साइंस कॉलेज मैदान में चल रहे युवा महोत्सव में आज एकांकी विधा के माध्यम से युवाओं ने समाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष कियाए वहीं समाज में फैली बुराईयों को दूर करने संदेश दिया। युवाओं ने अभिनय से कहानी को जीवंत करने का प्रयास किया। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में विभिन्न जिलों से आए युवा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। इनमें धमतरी जिले के युवा कलाकारों ने मदिरा और ऐशों.आराम में डुबे हुए हस्तिनापुर के राजा के जीवन को नाटक के माध्यम से प्र्रस्तुत किया। इस नाटक में आत्मिक उन्नति व सात्विक जीवन अपनाते हुए मानसिक शांति पाने का संदेश दिया गया। वहीं जशपुर के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरवाए गरूवाए घुरवा और बाड़ी के महत्व को नाटक के माध्यम से बताया। कलाकारों ने किसानों की आर्थिक उन्नति व जैविक खेती की ओर ध्यान आकृष्ट किया। इसी प्रकार कांकेर जिला के कलाकारों ने प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के उपयोग को रोकने तथा जन्म दिन जैसे अन्य अवसरों पर पेड़ लगाने का संदेश दिया। दुर्ग जिले के युवाओं ने प्रस्तुति में सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग की ओर ध्यान खींचा। खेती.किसानी में मोबाईल और कम्प्यूटर के उपयोग का महत्व बताया।
शास्त्रीय तबला वादन में युवाओं ने दिखाए जौहर :
तबला वादक सुरेंद्र सिंह ने तीन ताल में उठाव और रैला का गजब का संयोजन दिखाया वहीं मक्कड़ ने झप्प ताल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। साईंस कॉलेज मैदान में चल रहे युवा महोत्सव में तबला वादन की प्रतियोगिता में युवाओं ने तीन ताल सहित शास्त्रीय तबला वादन में विभिन्न घरानों की प्रस्तुति दी। मुंगेली से गोविंद मक्कड़ ने बताया कि यह एक कठिन विधा है जिसमें मात्र 2.2 ताल रहता है। उन्होंने बताया कि वे 5 साल की उम्र से ही तबला वादन कर रहे हैं। झप ताल 10 मात्रा की ताल है। वर्तमान में वे खैरागढ़ संगीत महाविद्यालय में तृतीय वर्ष के छात्र हैं। महासमुंद जिला के खिलेश्वर साहू ने मात्र 15 वर्ष की आयु में अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। तीन ताल में ठेकाए कायदा की प्रस्तुति दी। नारायणपुर से आए कक्षा नवमीं के छात्र अरविंद साहू ने 3 ताल में ही अपनी कला का प्रदर्शन किया। विज्ञान महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में चल रही इस प्रतियोगिता में विभिन्न जिले से 21 तबला वादको ने अपने जौहर दिखाए। इस प्रतियोगिता में शामिल युवाओं ने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे इस आयोजन की प्रशंसा की और कहा कि इससे युवा कलाकारों को एक नई दिशा और पहचान मिलेगी। युवाओं को एक प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर मंच मिल रहा है। सुप्रसिद्ध तबला वादक रेशमा पंडितए अशोक कुमार कुर्म एवं पदमालोचन जायसवाल ने प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभायी। निर्णायकों ने प्रस्तुति में लयए माधुर्य, अनुशासन, ताल और सामंजस्य के आधार पर अंक दिए।
तीन ताल क्या है :
तीन ताल हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध तालों में से एक है। यह उत्तर भारत में सर्वाधिक प्रचलित है। यह लयबद्ध सरंचना का सममित स्वरूप है। यह कुल सोलह मात्राओं का ताल हैं जिसमें चार.चार मात्राओं के चार विभाग होते हैं। तीसरे विभाग में खाली होती है जो नवीं मात्रा पर होती है। पहली मात्रा पर सम होता है। इसके मूल बोल हैं, धा धिन् धिन् धा। धा धिन् धिन् धा। धा तिन् तिन् ता। ता धिन् धिन् धा।
कैनवास पर उतरी छत्तीसगढ़ की संस्कृति :
ग्राम्य जीवन शैली, छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, रहन सहन, गहने और नदी नालों व प्राकृतिक खूबसूरती कैनवास पर युवाओं ने उतारा। राजधानी के साईंस कॉलेज मैदान में चल रहे युवा महोत्सव में ष्छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति विषय पर अनेक चित्र बनाये। खेल संचालनालय के हाल में हुई चित्रकला प्रतियोगिता में ए.श्रेणी में धमतरी से आए प्रतिभागी श्री मोहम्मद मुख्तार खान और बी.श्रेणी में गरियाबंद जिले के डी कृष्ण सोनी ने पहला स्थान हासिल किया। इस प्रतियोगिता में 29 युवाओं ने भाग लिया। प्रदेश स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में ए.श्रेणी में दूसरे स्थान पर सूरजपुर जिले के मुन्नालाल राजवाड़े और तीसरे नंबर पर अंबिकापुर ;सरगुजाद्ध जिले के श्री सतीश सोनी रहे। इसी तरह बी.श्रेणी में देवभोगए कोरबा जिले के श्री राहुल यादव द्वितीय और रायपुर के श्री रितिक पहरिया ने तीसरा स्थान हासिल किया। सभी विजयी प्रतिभागियों को ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में आज आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में निर्णायक के तौर पर प्रमोद साहू, श्रीमती जयश्री भगनानी और डा. प्रवीण शर्मा ने अहम भूमिका निभाई।