छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परम्पराएं समृद्ध : डॉ. महंत

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00 छत्तीसगढ़ की संस्कृति के समन्वित विकास के लिए राज्य शासन कृत संकल्पित : श्री साहू
रायपुर, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोक परम्परा समृद्ध है, इसे जानने के लिए प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ने की आवश्यकता है। जिससे प्रत्येक व्यक्ति लोक संस्कृति, लोक परम्परा एवं लोकगीत की जानकारी से अवगत हो सके। डॉ. चरणदास महंत आज जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला के शुभारंभ सत्र को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के गृह, जेल, धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने की।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के पुरा वैभव संपन्न जाज्वल्यदेव की नगरी जांजगीर धन-धान्य से परिपूर्ण है। यहां एक ओर कृषि उत्पादों का भरपूर उत्पादन होता है, वहीं दूसरी ओर लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न उद्योगों की स्थापना की गई है। जिला मुख्यालय में आयोजित जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला जिले के वैभव पर चार चांद लगा रहा है। डॉ. महंत ने जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीेटेक कृषि मेले के आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन जिले के उत्तरोत्तर विकास में सहायक होता है। मेला के माध्यम से मेल-मुलाकात और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। साथ ही हमारे सामाजिक समरसता की भावना को और अधिक बढ़ावा मिलता है। उन्हांेने कहा कि संत कबीरदास का नाम पूरी दुनिया में विद्यमान है। उनके विचारों संदेश और को अपनाकर आपसी भाईचारा एवं बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा गांवों और किसानांे के समृद्धि के लिए नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी के विकास को प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत नालों में बहकर बर्बाद होते पानी को रोकने, पशुधन की संरक्षण एवं संवर्धन, उनसे मिलने वाले उत्पादों के उपयोग, जैविक खाद बनाने, अपर्ने इंधन की व्यवस्था गांव में करने तथा बाड़ी के माध्यम से उद्यानिकी विकास की विस्तृत कार्य योजना बनाई जा रही है। गृह, जेल, धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और संस्कृति के समन्वित विकास के लिए राज्य शासन कृत संकल्पित है। धार्मिक स्थानों की सुरक्षा के लिए धार्मिक न्यास बनाये जायेंगे। प्रदेश के सभी पूजा स्थल एवं बड़े मंदिरों और पर्यटन स्थलों के रख-रखाव और उनकेे सुदृढ़ करने के लिए मंदिरों और पर्यटन स्थलों को चिन्हांकित किया जाएगा और पर्यटन आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की नयी सरकार के अपने प्रथम मंत्रीमण्डल की बैठक में छत्तीगसढ़ी की संस्कृति के अनुरूप और लोक मान्यता के अनुसार राजिम मेला का नामकरण माघी-पुन्नी मेला करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य के लोक कलाकारांे में ही राज्य की लोक संस्कृति, लोकगीतों और परम्पराओं को प्रस्तुत करने की असीम संभावना है। इसे देखते हुए राज्य उत्सव सहित अन्य कार्यक्रमों में राज्य की लोक कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा मंत्री मंडल की प्रथम बैठक में ही हजारों किसानों का लगभग 61 सौ करोड़ से अधिक रूपये की अल्पकालिक ऋण माफ किया गया है। उन्होंने कहा कि 2500 रूपये प्रति क्विंटल पर धान खरीदने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। कलेक्टर नीरज बनसोड़ ने जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला के बारे मंे विस्तापूर्वक जानकारी दी। अतिथियों ने इस अवसर पर कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले उत्कृष्ट कृषकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में चन्द्रपुर विधानसभा क्षेत्र विधायक रामकुमार यादव, पामगढ़ क्षेत्र की विधायक श्रीमती इन्दू बंजारे, गुरू बालदास, जिला पंचायत के अध्यक्ष नंदकिशोर हरबंश, पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन, चुन्नीलाल साहू एवं गोरेलाल बर्मन, चांपा नगर पालिका अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, जांजगीर-नैला नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मालती देवी रात्रे, अकलतरा नगर पालिका अध्यक्ष खुलन सोनवानी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण और नगरवासी मौजूद थे।

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