सुकमा : उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने सुकमा में समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

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00 आश्रम-छात्रावास मरम्मत एवं तेंदूपत्ता बोनस वितरण में अनियमितता की होगी जांच
00 बंद पड़ी नलजल योजनाओं को सुधारने के लिए चलाया जाएगा अभियान

सुकमा, उद्योग एवं वाणिज्य कर (आबकारी) मंत्री कवासी लखमा ने आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम-छात्रावास में किए गए मरम्मत की जांच के निर्देश दिए हैं। आज सुकमा जिला कार्यालय की सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में श्री लखमा ने कहा कि आश्रम-छात्रावास की मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए राशि के अनियमितता की जानकारी मिली है। उन्होंने इसकी जांच के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जिले के कुछ क्षेत्रों से तेंदूपत्ता बोनस वितरण में हुई अनियमितता के शिकायत की भी जांच के निर्देश दिए। श्री लखमा ने सुकमा, कोंटा और दोरनापाल में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित जल आवर्द्धन योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने के साथ ही बंद पड़ी या आधी-अधूरी नलजल योजनाओं को सुचारु रुप से संचालित करने हेतु अभियान चलानेे के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को भी पूरी गति के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि मनरेगा योजना तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुकमा जिला प्रशासन द्वारा बेहतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने सभी विभागों से अधिक गति के साथ कार्य करने को कहा, जिससे लोकहितकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जा सके। उन्होंने राज्य शासन द्वारा नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी के लिए संकल्पित होकर कार्य करने की बात कही तथा इस योजना की सफलता के लिए जल संरक्षण, जल संवर्द्धन के लिए तेज गति से कार्य करने को कहा। बैठक में मंत्री श्री लखमा ने इसके तहत छिंदगढ़ विकासखण्ड में गुटेर नाला, सुकमा विकासखण्ड में गीदम नाला और कोंटा विकासखण्ड में इंजरम नाला के संरक्षण का कार्य प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही शबरी नदी में पुसपाल से लेकर कोंटा तक व्यपवर्तन योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने हेतु कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुर्रेपाल में नदी में व्यपवर्तन के साथ ही बिरसठपाल, रेड्डीपाल, दुब्बाटोटा, पाकेला और मरईगुड़ा में तालाबों के गहरीकरण और मेंड़ों की मजबूती के लिए कार्य करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक के दौरान श्री लखमा ने तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए। इस क्षेत्र में ठेकेदारों द्वारा तेंदूपत्ता खरीदी नहीं किए जाने पर ग्राम पंचायतों के माध्यम से खरीदी करने के निर्देश देते हुए कहा कि राज्य शासन द्वारा तेंदूपत्ता की प्रति हजार मानक गड्डी की दर 25 सौ रुपए से बढ़ाकर चार हजार रुपए की गई है तथा तेंदूपत्ता संग्रहण इस क्षेत्र के वनवासियों की आय का मुख्य स्त्रोत है। उन्होंने खाद्य विभाग के अधिकारियों को धान उठाव में तेजी लाने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों से इस क्षेत्र के किसानों में आई जागरुकता के कारण लगातार बढ़ रहे धान की उपज को देखते हुए नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से दो नए गोदामों के निर्माण का प्रस्ताव राज्य शासन के समक्ष रखने के बात कही। इसके साथ ही मरईगुड़ा, एर्राबोर, नेतानार, चिंतलनार में धान खरीदी केन्द्र स्थापित करने हेतु राज्य शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए। इस क्षेत्र के किसानों द्वारा 1001 और 1010 प्रजाति के धान बीज की अधिक मांग को देखते हुए इसकी उपलब्धता के लिए भी राज्य शासन के समक्ष पहल की बात कही। इस अवसर पर कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेन्द्र ठाकुर, वन मंडलाधिकारी श्री बढ़ई, अपर कलेक्टर ओपी कोसरिया सहित जनप्रतिनिधिगण एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।