भारत ने 7 रोहिंग्याओं को वापस भेजा म्यांमार

0
35

नई दिल्ली: असम में गैरकानूनी तरीके से रह रहे 7 रोहिंग्या प्रवासियों को भारत ने गुरुवार को म्यांमार को सौंप दिया है। ऐसा पहली बार है जब भारत से रोहिंग्या प्रवासियों को म्यांमार वापस भेजा गया है। असम पुलिस ने म्यांमार के अधिकारियों को सातों रोहिंग्या सौंपे। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने आज असम में अवैध रूप से आए सात रोहिंग्याओं को उनके मूल देश म्यांमार भेजने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि सातों रोहिंग्या असम में अवैध प्रवासी हैं और म्यांमार ने उनको अपने नागरिक माना है इसलिए हम किए गए फैसले में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं।’’ वहीं इस मामले में याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट को रोहिंग्याओं के जीवन के अधिकार की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें अपनी जिम्मेदारी पता है और किसी को इसे याद दिलाने की जरूरत नहीं है। ये अवैध प्रवासी वर्ष 2012 में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद से ही असम के सिलचर स्थित हिरासत केंद्र में रह रहे हैं। म्यांमार राजनियकों को कांसुलर पहुंच प्रदान की गई थी, जिन्होंने प्रवासियों की पहचान की है। उल्लेखनीय है कि नए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बुधवार को कामकाज संभालते हुए स्पष्ट कर दिया था कि पीठ ऐसे मामलों में मानदंड तय होने तक तुरंत सुनवाई की अनुमति नहीं देगी। हालांकि अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया कि रोहिंग्या को स्वदेश वापिस भेजा जा रहा है, अत: इस मामले की तुरंत सुनवाई जरूरी है लेकिन पीठ ने कहा कि तुरंत सुनवाई संभव नहीं है।