कोण्टा में कांग्रेस के दादी के खिलाफ भाजपा से ‘दीदी’ का दावा

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राज्य निर्माण के बाद पहली जीत के लिए भाजपा नए चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी में
शिक्षित आदिवासी युवती के दावे से कोण्टा में सियासी सरगर्मी तेज
जगदलपुर। राज्य निर्माण के बाद बस्तर संभाग के कोण्टा विधानसभा में जीत का खाता खोलने के लिए आतुर भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में एक नया दांव खेलने की तैयारी में है। कोण्टा विधानसभा में अब तक अजेय माने जाने वाले कांग्रेस के कवासी लखमा (दादी)के मुकाबले इस बार भारतीय जनता पार्टी की तरफ से एक शिक्षित आदिवासी युवती दीपिका शोरी (दीदी) ने चुनाव लडऩे का दावा करते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भरोसा दिलाया है कि अगर उस पर भरोसा किया गया तो इस चुनाव में कोण्टा विधानसभा में पहली बार भाजपा का परचम लहराने से कोई नहीं रोक सकता है। दीपिका शोरी के इस दावे को भाजपा संगठन बेहद गंभीरता से ले रहा है और बहुत संभव है कि वह इस आदिवासी युवती पर दांव खेल दे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कह चुके हैं कि पढ़े-लिखे नौजवानों को राजनीति में आना चाहिए। उनकी इस सलाह पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पहल शुरू की और देशभर में अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ रहे लोगों को पार्टी में जोडऩे का काम शुरू किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल करते हुए अनेक नौकरशाहों को भाजपा में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की। रायपुर कलक्टर रहे ओमप्रकाश चौधरी से लेकर अनेक सेवानिवृत अधिकारियों ने पिछले दिनों भाजपा की सदस्यता हासिल की है।
नए चेहरों पर जोर
दो महीने बाद होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा परम्परागत चेहरों के बजाए नए व साफ-सुथरे चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी कर रही है। बे-दाग चेहरों को चुनाव मैदान पर उतारने से भाजपा को बहुत फायदा होने की संभावना है क्योंकि प्रचार के दौरान आरोपों का जवाब देने के बजाए वह प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की उपलब्धियां बेहतर तरीके से बता पाएगी।
चर्चा में दीपिका
बीते करीब डेढ़ दशक से संगठन में सक्रिय दीपिका शोरी कोण्टा विधानसभा में अचानक चर्चा का विषय बन गई हैं। छिंदगढ़-सुकमा के बीच स्थित पाकेला गांव की रहने वाली दीपिका शोरी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना राजनीतिक जीवन शुरू कर चुकी हैं। अनुराग सिंहदेव और फिर विजय शर्मा के नेतृत्व वाली प्रदेश भारतीय युवा जनता मोर्चा की कार्यसमिति में वे इकलौती युवती हैं। युवा मोर्चा ने उन्हें सुकमा जिले का प्रभारी भी बना रखा है। इसके अलावा वे भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स, छत्तीसगढ़ की राज्य उपाध्यक्ष भी है। उनकी अगुवाई में पिछले दिनों सुकमा में स्काउट्स एण्ड गाइड्स का सात दिवसीय एक बड़ा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है।
वर्तमान दावेदारों में सर्वाधिक शिक्षित
कोण्टा विधानसभा में भाजपा की तरफ से जिन दावेदारों के नाम हवा में तैर रहे हैं, उनमें दीपिका शोरी सर्वाधिक पढ़ी-लिखी हैं। स्नातकोत्तर के साथ वे विधि में स्नातक हैं तथा वर्तमान में रायपुर के शासकीय छत्तीसगढ़ कॉलेज से विधि में स्नातकोत्तर कर रही हैं।
दीपिका का दावा मजबूत
संगठन में लगातार सक्रिय दीपिका शोरी का दावा कई तरह से मजबूत माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनकी नजदीकियों के अलावा प्रदेश भाजपा के पदाधिकारियों ने उनके काम को बेहद निकटता से देखा है। दीपिका शोरी के माध्यम से भाजपा संगठन बस्तर में कोण्टा जैसे विधानसभा क्षेत्र में शिक्षित आदिवासी युवती को मैदान पर उतारकर यह प्रचार कर सकता है कि महिला सशक्तिकरण की बातें केवल भाषणों में ही नहीं बल्कि पार्टी यथार्थ में भी करती है।
एक नजर दावेदारों पर
कोण्टा विधानसभा से भाजपा की तरफ से आधा दर्जन से अधिक दावेदार हैं। इनमें धनीराम बारसे पिछला चुनाव हार चुके हैं। कांग्रेस से आए हुंगाराम मरकाम फिलहाल जिला भाजपा में महामंत्री हैं। प्राध्यापकी छोड़कर राजनीति में आए सोया मुक्का चुनाव लडऩे के लिए दावा कर रहे हैं। जिला भाजपा के एक नेता प्रसाद शर्मा की दूसरी पत्नी मौसम उत्ती के अलावा जमुना मांझी भी दावेदारों की सूची में शामिल हैं। इनमें जमुना मांझी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं तथा भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य हैं।

बड़े नेताओं के सामने दावा
अपने कामकाज तथा स्थानीय होने के आधार पर दीपिका शोरी ने संगठन के अधिकतर बड़े नेताओं से मिलकर चुनाव लडऩे की इच्छा जताई है। उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और बस्तर की राजनीति में खासी दखल रखने वाले हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सुभाष राव समेत अन्य नेताओं से मुलाकात करके उन्हें विश्वास दिलाया है कि उन्हें मौका मिला तो इस बार कोण्टा विधानसभा क्षेत्र भाजपा के हिस्से में जाएगा।

चुनौती और जोखिम है पर मौका मिला तो मंजूर है…
निश्चित रूप से कोण्टा विधानसभा क्षेत्र नक्सल प्रभावित है। वहां चुनाव लडऩा बेहद चुनौती और जोखिम भरा काम होता है परंतु मैं भी स्थानीय हूं। मेरा जन्म पाकेला में हुआ है और मैं वहां की रीति-नीति से वाकिफ हूं। मैंने संगठन के नेताओं से मिलकर अपने काम का विवरण दिया और उसी आधार पर चुनाव लडऩे की इच्छा जताई है। मुझे भरोसा है कि पार्टी नेतृत्व मेरे विषय में गंभीरता पूर्वक विचार करेगा। इस चुनाव में भाजपा को कोण्टा का किला जीतना ही है। अगर मुझे मौका दिया जाएगा तो निश्चित रूप से परिणाम भाजपा के पक्ष में रहेगा।
दीपिका शोरी
भाजपा दावेदार, कोण्टा विधानसभा क्षेत्र