गौरांग बोबडे हत्याकांड में हाईकोर्ट ने खारिज की क्रिमिनल रिविज़न अपील |

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बिलासपुर । गौरांग बोबड़े हत्याकांड के चारों आरोपियों की क्रिमिनल रिवीजन अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। सभी आरोपियों ने अपने वकील के जरिए याचिका दायर कर अपने आपको निर्दोष बताते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज करने की गुहार लगाई थी।
रामा मैग्नेटो मॉल स्थित टीडीएस बार में 21 जुलाई वर्ष 2016 को आधी रात को गौरांग बोबड़े की माल की सीढ़ी से गिरकर मौत हो गई थी । घटना के दौरान उसके साथ किंशुक अग्रवाल, करण जायसवाल, करण खुशलानी व अंकित मल्होत्रा भी मौजूद थे। गौरांग की मौत के बाद चारों दोस्त बिना कुछ बताए बार से अपने घरों की तरफ चले गए। घटना की सूचना बार के संचालक ने पुलिस को दी । मौका मुआयना व सीसीटीवी कैमरा की रिकॉर्डिंग के बाद पुलिस ने गौरांग के चारों दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। गौरांग की हत्या के आरोप में सिविल लाइन पुलिस ने चारों को आरोपी बनाते हुए भादवि की धारा 302 व 304 भाग दो 201 34 के तहत जुर्म पंजीबद्घ करते हुए जेल भेज दिया था। चारों आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। इस दौरान अपने वकील के जरिए अपने आपको निर्दोष साबित करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन अपील पेश की थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस आरसीएस सामंत की सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने क्रिमिनल रिवीजन अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घटना के पहले और बाद में सभी चारों आरोपियों ने तथ्यों को जानबूझकर छिपाया है। लिहाजा क्रिमिनल रिवीजन अपील खारिज की जाती है।

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