आईएस से जुड़े ज्यादातर आतंकी महिलाओं के प्रति विकृत सोच वाले

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लंदन। बलात्कारी और पत्नी से मारपीट करने वाले बीमार मानसिकता के पुरुषों ने आतंकी संगठन आईएस का दामन थामा है। ब्रिटेन की हेनरी जैक्सन सोसाइटी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। शोधकर्ता निकिता मलिक ने बताया कि बहुत बड़ी संख्या में महिलाओं का उत्पीड़न करने की चाह रखने वाले युवा आतंकी बनने को आगे आए हैं, क्योंकि आतंकी संगठन की विचारधारा में महिलाओं का उत्पीड़न करने, उन्हें यौन गुलाम बनाने और उनके साथ बलात्कार को सही ठहराया गया है।
आईएस खुलेआम कहता है कि युद्ध में बंधक बनाई गई महिलाओं का यौन उत्पीड़न जायज है। आतंकी संगठन यौन उत्पीड़न के जरिए इन बीमार मानसिकता वाले पुरुषों को आकर्षित और पुरस्कृत करता था। आईएस ने मानव तस्करी और यौन शोषण को अपनी कमाई का जरिया बना रखा था। आतंकी संगठन के कब्जे वाले इलाकों में महिलाओं की सरेआम नीलामी की खबरें सामने आती रही हैं।
ब्रिटेन मूल के कुख्यात आतंकी सिद्धार्थ धार, खालिद मसूद, आंडगो अहमद समेत कई आईएस आतंकियों ने यजीदी महिलाओं को अपना गुलाम बना रखा था। अहमद को 16 साल की एक लड़की से रेप के आरोप में आठ साल की सजा हुई थी। जेल से जमानत पर बाहर निकलने के बाद 2013 में वह सीरिया भाग गया और उसने आईएस ज्वाइन कर ली। अमेरिका, यूरोप से आईएस में शामिल हुए कई लड़ाकों का महिलाओं के उत्पीड़न का अतीत रहा है। लंदन में इस साल हुए ब्रिज अटैक के आरोपी मोहम्मद लाउएज बुहलेल और पिछले साल नीस में हुए आतंकी हमले के आरोपी रिचर्ड रेलुएन का भी महिला उत्पीड़न का इतिहास रहा है।

 

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