डाकघर के चक्कर लगाते ग्रामीण

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धमतरी। वैसे तो धमतरी जिले को मनरेगा में बेहतर काम करने के लिए कई पुरस्कार मिल चुके हैं, लेकिन फिर भी मनरेगा के तहत काम कर रहे ग्रामीणों का यहां बुरा हाल है.दरअसल मनरेगा के तहत काम किए मजदूरों का भुगतान सालों से लंबित है, जिसके कारण उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है. मजदूरी के लिए वे दर-दर भटक रहे हैं, उसके बावजूद उन्हें उनकी मजदूरी नहीं मिल पा रही है.

नगरी के दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां रोजगार गारंटी योजना के तहत सड़क निर्माण, तालाब गहरीकरण और खेत समतलीकरण कराया गया था. वहीं सिंचाई विभाग ने करीब 2 साल पहले नाली निर्माण का काम भी कराया था, लेकिन अब तक मजदूरों को एक रुपए मजदूरी भी नहीं दी गई है.वहीं कुछ मजदूरों की समस्या चेक द्वारा भुगतान नहीं हो पाने की भी है. दरअसल साल 2015 में नगरी के 6 गावों के करीब 300 मजदूरों ने काम किया. इनमें से कई निर्माण कार्यों के लिए चेक से भुगतान किया गया. लेकिन अब मजदूर चेक लेकर भटक रहे हैं. दरअसल इन मजदूरों का मनरेगा के तहत खाता नहीं खुला है. एक मजदूर ने बताया कि वो कई दिनों से पोस्ट ऑफिस बिरगुड़ी का चक्कर लगा रहा है, लेकिन काम नहीं हो पा रहा, क्योंकि चेक सिर्फ वही जमा कर सकता है, जिसका खाता मनरेगा के तहत खुला है.इधर जिन मजदूरों का खाता है और जिन्हें चेक मिल भी गया है, वे इसलिए परेशान हैं क्योंकि डाकघर में लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं. एक दिन में अधिकतम 15 मजदूरों का भुगतान हो पाता है. बाकी मजदूरों को लौटा दिया जाता है. ऐसे में कई मजदूर 3-4 दिनों से पोस्टऑफिस जाकर लौट रहे हैं.इधर जिन मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है, उनका कहना है कि उन्होंने इसके लिए कई बार आंदोलन भी किए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. अब दीवाली का त्योहार सर पर है और वे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अगर उन्हें भुगतान हो जाता है, तो वे भी दीवाली मना सकें.

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