रायपुर-तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को पढाई के लिए मिल रही छात्रवृत्ति |

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रायपुर : चरण पादुका योजना का बड़ा असर हुआ है और पैर कटने या जख्म होने की घटनाओं में कमी आई है। डॉ. रमन सिंह ने आज रमन के गोठ कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश भर में लगभग 14 लाख से 15 लाख लोगों की जिन्दगी तेन्दूपत्ता संग्रहण से चलती है। राज्य सरकार ने उनकी मजदूरी की दर 350 प्रतिमानक बोरा से बढ़ाते हुए 1800 रूपए कर दिया है। हमने तेन्दूपत्ता संग्राहकों के जीवन में बेहतरी के लिए योजनाएं बनाई है। चरणपादुका योजना की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा-इस छोटे से काम की वजह से यानी 14 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका देने का असर यह हुआ है कि पिछले आठ-दस वर्षों में पैर कटने की या जख्म होने की घटनाओं में काफी कमी आयी है। राज्य सरकार उनके बच्चों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, आईटीआई और पालीटेक्निक में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति भी दे रही है।प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 25 हजार आदिवासी परिवारों को तेन्दूपत्ता तोड़ने में जो दिक्कत होती है, उसे ध्यान में रखकर उन्हें हर साल दो हजार रूपए कैम्पा निधि से दिए जा रहे हैं, ताकि तेन्दूपत्ता तोड़ने से उनको जो आमदनी होती, उसकी भरपाई की जा सके।डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के वनवासियों को साल बीज, हर्रा, कुसुमी लाख, रंगीनी लाख, चिरौंजी, इमली और महुआ गुठली के संग्रहण के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में धान के साथ-साथ अब मक्के की खेती में भी वृद्धि हो रही है।

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