दंतेवाड़ा के मुर्गा दंगल में लगा 10 करोड़ का दाव

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                     हर साल दशहरा के समापन पर लगता है मुर्गा बाजार
रायपुर। ग्राम पंचायत डिलमिली इस बार भी सुर्खियों में है। शनिवार को दो दिवसीय वार्षिक बाजार में मुर्गो का दंगल शुरू हो गया। दो दिन में यहां करीब 10 हजार मुर्गो के जोड़े चोंच और पंजा लड़ाएंगे। दिलचस्प यह है कि दो दिन में ही करीब 10 करोड़ तक का दांव लगेगा। मुर्गा बाजार के व्यवस्थापक व सरपंच आयतूराम मंडावी ने बताया ‎कि निवार दोपहर 1 बजे से शाम पौने 5 बजे तक करीब दो हजार मुर्गो की लड़ाई हुई और रविवार को सुबह 6 बजे से लड़ाई शुरू है। यह दंगल पारंपरिक रूप से होता आ रहा है। इसमें प्रशासन कोई हस्तक्षेप नहीं करता। ऐसी मान्यता है कि दशहरा के बाद मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा लौट आती हैं।
हर साल दशहरा के समापन पर मुर्गा बाजार लगता है। इसमें ताकतवर मुर्गों की लड़ाई होती है। इस पर लोग दांव लगाते हैं। शनिवार को पूरे मैदान में लड़ाई के दौरान लाली. लाली. खैरा. खैरा. जोंधरी. जोंधरी जैसा शोर गूंज रहा था। ये सब मुर्गो के नाम हैं। मुर्गों की टांग के नीचे और पंजे से थोड़ा ऊपर काटी (छोटी छुरी) बंधी होती है। इसी से मुर्गे एक-दूसरे पर वार करते हैं। बुरी तरह घायल होने के बाद जब कोई मुर्गा लड़ने की स्थिति में नहीं रहता और मरणासन्न हो जाता है, तब लड़ाई खत्म होती है।
जिला मुख्यालय से 34 किमी दूर एनएच-63 पर स्थित डिलमिली में कई दशक से यह दंगल होता है। लड़ाकों को असुविधा न हो, इसलिए यहां दांव क्षेत्र बनाया जाता है। मुर्गा लड़ाने वाले से 50 रुपए प्रवेश शुल्क तो कुर्सी पर बैठकर दांव लगाने वालों से 100 रुपए ‎लिए जाते हैं। मुर्गा लड़ाने वाले पहले अपने मुर्गे के बराबर के वजन व कद वाला मुर्गा ढूंढते हैं। फिर दोनों में दांव की राशि तय होती है। जैसे ही इनके मुर्गे लड़ाने के लिए मैदान में लाए जाते हैं, वैसे ही घेरा बनाकर खड़े ग्रामीण शोर मचाते हैं। इसमें लोग हाथों में नोट लेकर दांव लगाते हैं। यह प्रक्रिया ताश के काट पत्ती खेल जैसी होती है। दंगल में छोटे मुर्गे पर 10 हजार तो बड़ं पर 40 से 50 हजार रुपए तक के दांव लगते हैं। एक लड़ाई में औसतन 10 हजार रुपए के दांव के हिसाब से दो दिन में करीब 10 हजार जोड़ों पर 10 करोड़ रुपए तक के दांव लगने की संभावना है। शनिवार को भाजपा के पूर्व विधायक भीमा मंडावी, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष समुंद साय कच्छ भी मुर्गा लड़ाने पहुंचे थे।

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