कोरबा में रमन के गोठ का किया गया श्रवण

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बूंद-बूंद पानी बचाकर गर्मी में पानी की करे बचत: मुख्यमंत्री
कोरबा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित 32 वी कड़ी मासिक रेडियोवार्ता रमन के गोठ में कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की अधिक आवश्यकता होती हैै। यदि सभी अपने दैनिक उपयोग में पानी के महत्व को समझते हुये बूंद-बूंद बचत करे तो सबको पानी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया जिस तरह बदल रही है उससे पर्यावरण को बहुत नुकसान भी हुआ है। ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन विश्व स्तर पर चिंता के कारण बन गये है। देश के प्रधानमंत्री द्वारा ‘वन ड्राप, मोर क्राप’ का आव्हान किया गया है। जिसके अनुसार बूंद-बूंद पानी का सदुपयोग किया जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 47 प्रतिशत सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं का निर्माण शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा- हमने दूरगामी योजना के तहत नदियों को जोडऩे की परियोजनाओं पर भी विचार किया है। उन्होंने छह ऐसी लिंक परियोजनाओं के बारे में बताया। इसके अंतर्गत महानदी-तांदुला, पैरी-महानदी, रेहर-अटेंग, अहिरन-खारंग, हसदेव-केवई और कोड़ार-नैनी नाला लिंक परियोजनाएं शामिल हैं। नदियों में हमेशा जल भराव रहे, उनके किनारे वृक्षारोपण हो और जल संरक्षण तथा संवर्धन का अभियान चलाया जाए। इसके लिए तकनीकी मार्गदर्शन हेतु ईशा फाउंडेशन के साथ एमओयू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा-इसके अलावा हमने वर्षा जल को एकत्रित करने के लिए अनेक छोटे-छोटे उपायों को बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में रोकने में मदद मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए जल संसाधनों के विकास और जल संरक्षण के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का उल्लेख करने के साथ-साथ सभी नागरिकों से बूंद-बूंद पानी बचाने का भी आव्हान किया है। कोरबा स्थित सियान सदन,प्रियदर्शिनी इंदिरा स्टेडियम सहित विभिन्न स्थानों में रमन के गोठ का श्रवण किया गया। सियान सदन में राम प्रसाद मिरी, अरूण बघेल, देवेन्द्र स्वर्णकार,यू डी महंत अजीत कुमार, दानिश आदि उपस्थित थे।
ग्रीष्म अवकाश का सदुपयोग करे स्कूली बच्चे,गर्मी से बचे
मुख्यमंत्री डॉ सिंह ने ग्रीष्म ऋतु में जल संरक्षण एवं पानी के सदुपयोग की बात तो कही ही, साथ नही उन्होंने बच्चों और पालकों को बताया कि इस बार गर्मी की छुट्टी 1 मई से 16 जून यानी डेढ़ माह तक पूरी छुट्टी मिलेगी। बच्चे गर्मी की छुट्टियों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। अपनी दादी-नानी, बुआ-मौसी-मामी व अन्य रिश्तेदारों के गांव-घर या अन्य जगह घूमने जा सकते है। अपनी हॉबी के अनुरूप कुछ नया सीख सकते हैं। जैसे, खेल, संगीत, नाटक या कोई सृजनात्मक कला। इस तरह आपके समय का सदुपयोग के साथ मनोरंजन भी होगा। उन्होंने सबको परीक्षा में सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुये कहा कि जो लोग सफलता से एक-दो कदम पीछे रह जाते हैं, उन्हें पूरी हिम्मत से मैदान में डटे रहना चाहिए, क्योंकि मेरा अनुभव है कि पहले प्रयास में जो थोड़ा पीछे रह जाता है, वह ज्यादा मन लगाकर तैयारी करता है और अपनी मेहनत से बड़ी सफलता हासिल भी करता है। पालकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ सहानुभूति और दोस्ती का व्यवहार रखें। सदैव प्रेरक और तनाव मुक्त वातावरण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में गर्मी तेज होगी। खासकर बच्चों को चाहिए कि वे दोपहर का समय घर के बाहर न बिताएं। छायादार स्थानों पर ही रहें।
पेड-पौधे व पशु-पक्षियों को पानी दे
मुख्यमंत्री डॉ सिंह ने कहा कि ग्रीष्म ऋतु में आप लोग आसपास के पेड़-पौधों को पानी दें। पशु-पक्षियों के लिए भी पानी रखें। चिडिय़ों के लिए जगह-जगह सकोरे में पानी भरकर रखें। आपकी छत या आंगन पर जब चिडिय़ा पानी पीने आएंगी तो, आपको देखकर बहुत खुशी होगी। आप कभी मुख्यमंत्री निवास आएंगे, आप देखेंगे मुख्यमंत्री निवास में पेड़ों पर सकोरे लटके हैं। छत पे हमने पानी रखा है और यदि आप वहां आएंगे तो सैकड़ों पक्षी सुबह-सुबह वहां पानी पीते हुए मिलेंगे। शाम को पानी पीते हुए मिलेंगे। ये निश्चित रूप से मेरा अनुभव है और आप जब इस काम को अपने घर के आस-पास अपने परिवेश में करेंगे, तो आपको भी एक सुखद अनुभव महसूस होगा।
महापुरूषों को किया याद
मुख्यमंत्री डॉ सिंह ने 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जानकारी देते हुये कहा कि बाबा साहब ने हमारे देश को दुनिया के महानतम गौरवशाली संविधान की सौगात देकर हम भारतवासियों को सदैव सम्मान और स्वाभिमान से रहने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। वे सिर्फ पिछड़े और कमजोर तबकों के ही मसीहा नहीं थे, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों के प्रेरणा-स्त्रोत बनेे। उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा की बधाई देते हुये संत शिरोमणी सेन महाराज, महाप्रभु वल्लभाचार्य, भगवान परशुराम, गुरु गोविंद सिंह, आदि शंकराचार्य को याद करते हुये इनके समाज में योगदान को बताया।

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