इस तरह छुड़ाया जा सकता है इंटरनेट का चस्का

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न्यूर्याक। डिजिटल संसार में बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन होना आम बात है। कुछ हद तक यह ठीक भी है। क्योंकि इंटरनेट अब पढ़ाई-लिखाई के लिए जरूरी हो चुका है। दूसरी ओर इंटरनेट की लत उनके बचपन और यहां तक कि उनकी जिंदगी पर भी खतरा हैं। हम आपसे साझा कर रहे हैं, ऐसे कुछ तरीके, जिनसे आप बच्चों पर नजर रख सकते हैं कि वे इंटरनेट पर क्या कर रहे हैं।
पेरेंटल कंट्रोल एप्लीकेशन आता है। ये मोबाइल में डालकर कुछ खास गेम्स या एप्स को लॉक किया जा सकता है, जो आपको लगता है कि आपके बच्चे के लिए ठीक नहीं। बच्चों से इंटरनेट के उपयोग पर बात करें। ये किसी भी लॉक से बेहतर काम करता है। उन्हें बताएं कि वर्चुअल स्पेस में ज्यादा समय बिताना कैसे उन्हें या किसी को भी रीयल दुनिया से अलग कर सकता है। इंटरनेट के दूसरे खतरों पर भी खुली चर्चा की जा सकती है। उन्हें उदाहरण देकर समझाया जा सकता है कि किस तरह से कुछ खास गेम्स लत लगा देते हैं और पढ़ाई से दूर कर देते हैं।
बच्चा अगर सोशल मीडिया पर एक्टिव है तो प्राइवेसी पर बात की जानी चाहिए। किस तरह से फोटो या पोस्ट पर गलत किस्म के लोग ट्रैप या ट्रोल कर सकते हैं, ये भी बताएं। इंटरनेट के इस्तेमाल के लिए कुछ नियम तय किए जाने चाहिए। कब, कितनी देर इंटरनेट चलेगा। बच्चा किनसे संपर्क न करे। दोस्ताना व्यवहार रखें ताकि किसी मुसीबत में आपसे बात करने से घबराए नहीं। सोशल मीडिया पर उनके दोस्तों की सूची में आप भी शामिल हो सकते हैं। उन्हें यकीन दिलाएं कि आप उनकी वॉल पर कभी शर्मिंदा करने के लिए नहीं आएंगे, लेकिन दोस्तों की सूची में आपका होना क्यों जरूरी है। ब्राउजिंग साइट्स पर तगड़ा नियंत्रण रखें। ये किसी तरह की शर्म की बात नहीं और न ही इससे आपके दोस्ताना ताल्लुकात पर कोई फर्क पड़ेगा। कमउम्र बच्चा किस तरह की साइट देख रहा है, इसपर नजर रखना आपके लिए बेहद जरूरी है।

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