छत्तीसगढ़ की धरती पर सफल हो रही सरकारी योजनाएं : जावड़ेकर

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रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के लिए बेहतर कार्य किया है। सरकारी योजनाएं और कार्य यहां की धरती पर सफल होते दिखाई देते हैं। मैंनें छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचल के नवयुवकों को आईआईटी, आईआईएम, सिविल सर्विस परिक्षाओं में आगे आते देखा है। शुक्रवार को ये बातें केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कही। वे यहां मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान समारोह और अक्षर सम्मेलन कार्यक्रम के तहत रायपुर के इंंडोर स्टेडियम में बतौर मुख्य अतिथि जनता से मुखातिब थे । उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विज़न से प्रदेश के दूरदराज के, आदिवासी गांव जहां नक्सलवादी और माओवादी विकास नहीं होने देना चाहते वहां के युवा आगे आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य को अग्रिम पंक्ति में लाने का काम किया है। जावड़ेकर ने कहा कि जब हम आजाद हुए तब देश में साक्षरता 18 प्रतिशत थी। आजादी के 20-25 वर्षों में हमें पूर्ण साक्षर हो जाना था, लेकिन 70 वर्षों बाद भी देश में मात्र 81 प्रतिशत लोग साक्षर हैं। देश के 19 प्रतिशत लोगों का आज भी साक्षर होना बाकी है। केन्द्र सरकार का लक्ष्य है कि हम देश को 2022 तक पूर्ण साक्षर बनाकर रहेंगे। उन्होंने बताया कि 1960 में साक्षरता अभियान में उनकी माता लोगों को अक्षर ज्ञान देने जाती थीं तो वे भी उनके साथ जाते थे। इससे वे भली भांति परिचित हैं कि अक्षर ज्ञान देने में किस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अक्षर सीखाना आसान है लेकिन नुक्ता और बिंदी कैसे लगाई जाए इसमें तकलीफ होती है। असाक्षर होने का अर्थ है आप देख, सुन सकते हैं लेकिन समझ नहीं सकते।
बच्चे अपने माता-पिता और दादा-दादी को बनाएं साक्षर :
उन्होंने कहा कि, हर घर का बच्चा किसी न किसी स्कूल में जाता है। बच्चों को भी इस प्रकार की शिक्षा दी जाएगी कि यदि उनके माता-पिता या दादा-दादी को पढऩा लिखना नहीं आता तो बच्चे उन्हें सिखाएंगे। परिजनों को भी इस बात पर गर्व होगा कि हमारा बच्चा हमें साक्षर बना रहा है। जावड़ेकर ने चिंता जताई कि आज भी देश के 80 लाख बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। सरकार एक अभियान चलाने जा रही है, स्कूल चलो भाई स्कूल चलो। इसके तहत सभी पंच सरपंच, जनप्रतिनिधियों का दायित्व होगा कि उनके क्षेत्र का कोई भी बच्चा जो स्कूल नहीं जाता है उसे स्कूल भेजें। एक भी बच्चा स्कूल के बाहर न रहे।
प्रदेश को मिले 11 जवाहर नवोदय विद्यालय :
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने एक नया कीर्तिमान रचा है, प्रदेश को आज एक दिन में 11 जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्वीकृति केन्द्र सरकार ने दी है। छत्तीसगढ़ की आवाज अब दिल्ली में गूंजती है जब यहां की ग्राम पंचायत को देश के उपराष्ट्रपति और केन्द्रीय मंत्री सफलता के लिए सम्मानित करते हैं। उन्होंने कहा प्रदेश में 74 प्रतिशत लोग ही साक्षर हैं। वहीं कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां और भी कम साक्षरता है। प्रेरकों को अब बचे हुए नागरिकों को साक्षर करने का काम करना है। जनता को साक्षर होना जरुरी है क्योंकि अब सरकारी योजनाओं से मिलने वाली राशि लोगों को सीधे अकाउंट में मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रेरकों से आह्वान किया कि उन्हें ज्ञान की ज्योति कमजोर तबकों तक लेकर जानी है। क्योंकि अब आपका नाम इतिहास में दर्ज होने वाला है। क्योंकि प्रदेश की तीन चौथाई जनता ही साक्षर है और बचे हुए एक चौथाई असाक्षरों को आप साक्षर बनाएंगे।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा और आदिम जाति विकास मंत्री केदार कश्यप, कृषि और जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, लोकसभा सांसद रमेश बैस, संसदीय सचिव अम्बेश जांगड़े सहित अनेक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रदेशभर से आए साक्षरत भारत अभियान से जुड़े हजारों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
इनका हुआ सम्मान :
कार्यक्रम में प्रदेश के दो जिलों-रायपुर और बलरामपुर सहित तीन विकासखण्डों-लखनपुर (जिला सरगुजा), छुईखदान (जिला-राजनांदगांव) और बस्तर (जिला बस्तर) तथा सात ग्राम पंचायतों-खैरझिटी (जिला कबीरधाम), सुखरीडबरी (जिला महासमुंद), मनिकोटा (जिला-सुकमा), तिलकेजा (जिला-कोरबा), लिगियाडीह (जिला-बिलासपुर), छोटे कलुआ (जिला-कोरिया), और भकुर्रा (जिला-रायगढ़) को सम्मानित किया गया। जन शिक्षण संस्थान सरगुजा को भी इस अवसर पर मुख्यमंत्री अक्षर सम्मान से नवाजा गया। संबंधित जिलों के पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया।

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