सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया।

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नई-दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर अगले छह महीने तक के लिए रोक लगा दी है, संसद जब तक इस पर कानून नहीं लाती, तब तक ट्रिपल तलाक पर रोक रहेगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को संसद में इस पर कानून बनाने के लिए कहा है, पांच सदस्यीय बेंच में 3 जजों ने इसे अंसवैधानिक माना और 2 जज इसके पक्ष में नहीं थे। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 22 अगस्त का दिन मुकर्रर किया गया था। यह पूरा मामला तब सामने आया जब उतराखंड की शायरा बानो ने मार्च, 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी, शायरा का तर्क था कि तीन तलाक न तो इस्लाम का हिस्सा है और न ही आस्था। कोर्ट में दाखिल याचिका में शायरा ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं के हाथ बंधे होते हैं और उन पर तलाक की तलवार लटकती रहती है, वहीं पति के पास निर्विवाद रूप से अधिकार होते बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। इस खंड पीठ में सभी धर्मों के जस्टिस शामिल हैं, जिनमें चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चिएन), जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यूयू ललित (हिंदू) और जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) शामिल हैं। आज का दिन उन गरीब और असहाय मुस्लिम महिलाओं को राहत देगा, जो समाज में चल रही पूर्व परिस्थियों के कारण अपने हक़ से वंचित हो जाती थीं।

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